Thursday, May 7, 2009

इर्दगिर्द वाले भाई हरि जोशी के दोनों हाथों में लड्डू...


14 comments:

  1. वाह !! क्‍या खूब बनाया है।

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  2. अरे!ये तो कलम और कैमरा हैं, एके47 से भी खतरनाक!

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  3. हरि भाई तो लाजवाब है, वह बहुत सारी विधाओं में दक्ष हैं और बहुत मिलनसार और दिलचस्प व्यक्तित्व ।

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  4. अरे भाई इस मेहरवानी के लिए शुक्रिया। लेकिन मैं हरी नहीं हरि हूं। भाई अजित वडनेकर से गुजारिश हैं कि वह शब्‍दों के सफर में कभी हरी और हरि के बीच का फर्क जरुर बताएं।

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  5. क्षमा चाहूंगा। टंकण में गलती हो गई। शब्‍दों के सफर वाले शब्‍द विशेषज्ञ अजित वडनेरकर..

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  6. गलती सुधार दी है हरि भाई, दरअसल ये रोमन लिखने और जल्दवाजी के कारण हुआ.

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  7. आभार आपका भाई।

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  8. हरी और हरि
    हरी घास और
    हरि आकाश
    दूर होते हुए
    दोनों पास
    क्‍या ये फर्क है।

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  9. मस्त लग रहे है हरि भाई।देख कर तबियत हरी हो गई।

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  10. :)..ye laddooo hain??yah to hathiyaar se kam vastuyen nahin hain..

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  11. बहुत मस्त बनाया है हरि जी को!!

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