Monday, May 4, 2009

आज कुछ हट कर:- अब कोलकाता 'टाईट' रायडर...


शाहरुख़ उर्फ़ बौलीवुड के बादशाह की इन दिनों नींद उड़ी हुई है. अरसा हो गया 'ओम शांति ओम' के हिट होने का जश्न मनाये हुए. इनदिनों तो सपनों में भी शांति नसीब नहीं हो रही . सोचा था इस बार 'कोलकाता नाईट रायडर' कुछ दम दिखायेंगे पर वे तो नाईट वाचमेन की तरह भी नहीं खेल पा रहे. हद हो गई उनकी 'जारा' ने उनकी 'वीर'ता को फुश्श कर दिया. फराह खान ने जब उनकी ये हालत देखी तो अपने खास ज्योतिष, जिनसे वे अपनी फिल्मों के सफल होने के टोने-टोटके करवाती रहती हैं को लेकर शाहरुख़ के 'मन्नत' पहुँच गईं। ज्योतिष ने शाहरुख़ के माथे पर पड़ती गहरी लकीरों को देखा तो दुखी स्वर में बुदबुदाया-हुजूर , ये क्या हालत बना ली आपने. यूँ तो आपको हिरोइन के साथ नाचने-गाने वाली फिल्में मिलनी बंद हो जाएँगी. प्रियंका चोपडा और दीपिका के पापा-दादा के रोल मिलने शुरू हो जायेगे. 'नाईट रायडर' ने तो आपको उम्र के 'नाईट शो' में पहुंचा दिया है. जब उसकी नजर पीछे दीवार पर लगे 'कोलकाता नाईट रायडर' के विशाल पोस्टर पर पड़ी तो वह और भड़क गया. बोला- टीम का ये वाहियात लोगो बनाने की आपको किसने सलाह दी ? नाम और लोगो दोनों ही अशुभ हैं...'ओम शांति ओम' एक फिल्म थी,उसकी थीम को आपने यहाँ क्यों आजमाया? फिल्म में आपने अपनी हिरोइन को आग के हवाले कर दिया , फिल्म हिट हो गई पर यह नुस्खा क्रिकेट में नहीं चला, हेलमेट में आग क्या लगाई , टीम ही झुलस गई. इधर भारत में इतनी गर्मी पड़ रही है ऐसे में ये आग किसी को नहीं सुहा रही. सोने का आपका ये हेलमेट जल रहा है , सोना पिघल रहा है. यूँ तो हेलमेट का आमलेट बन जायेगा. वास्तु के हिसाब से ये ठीक नहीं है . ये आग बुझाओ . इसके लिए आग बुझाने वाले यन्त्र बनाने वाली किसी कम्पनी से एड भी मिल जायेंगे. नाम भी बदल कर 'नाईट' की जगह 'टाईट' करदो, खिलाडी कुछ तो टाईट होंगे. विदेशी कोच में भी लोचा है, कभी आपने देसी कोच लेने का नहीं सोचा है? देसी दर्शकों ने ही तुम्हें टीम खरीदने लायक बनाया है फिर क्यों विदेशी-विदेशी भज रहे हो..........ज्योतिष और भी बहुत कुछ कहता जा रहा था पर शाहरुख़ अब कुछ सुन नहीं रहे थे , उनके ज्ञान चक्षु खुल चुके थे. वे उठे और फोन पर १०१ डायल करने लगे. अब उन्हें हेलमेट की आग कुछ ज्यादा ही झुलसाने लगी थी.

3 comments:

  1. कमल है सर. कार्टून्स मैं तो आपका व्यंग्य कौशल झलकता ही था, लेखन में भी वही तीखापन है. कलम का यह दोहरा जादू वाकई जादू जगाने वाला है. आप कलम के इस दूसरे पहलू को भी बराबर उजागर करते रहोगे. यही उम्मीद है और यही दुआ भी.

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  2. हेल्मेट का आमलेट भी झुलसकर कोयला हो गया है असफ़लता की आग मे। अब फ़िल्मी चमत्कार या फ़िर सट्टेबाज़ ही बचा सकते है पेपर टाईगर को।सटीक।

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  3. सही जा रहे हो, मित्र ! ऎसे ही इनको रिन वाशिंग पाउडर से धोते रहो !
    धारदार.. बारबार.. लगातार..
    यह व्यँग्य चलता रहे !

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